August 13, 2022

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बिहार की ये नदियां जो हर साल बनती है तबाही की वज़ह, अब तक करोड़ों का नुकसान

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देश एक तरफ जहां कोरोना महामारी से जूझ रहा है वहीं दूसरी ओर बाढ़ की विभीषिका आम लोगों के संकट को और बढ़ा रही है। असम, बिहार समेत देश के एक दर्जन से अधिक राज्य बाढ़ के कहर का सामना कर रहे हैं। नेपाल से आने वाली कोसी-गंडक जैसी नदियां बिहार में भीषण तबाही मचा रही हैं। लाखों की तादाद में लोग बेघर हुए हैं, सैंकड़ों लोगों की बाढ़ के कारण जान गई है तो खेती को भी बड़ा नुकसान हुआ है।

नदियां जो हर साल बनती हैं तबाही का कारण-

ये एक सच है कि जो नदियां अपने आसपास के इलाकों में खुशहाली का कारण होती हैं वही अपने आसपास के इलाकों में तबाही का कारण भी बनती हैं, बिहार जैसे राज्य जहाँ कृषि ही प्रधान है, उदाहरण स्वरूप देखा जाए तो बिहार का 73.63 प्रतिशत हिस्सा हर साल बाढ़ की खतरें पर झूलता रहता है।
बिहार के 38 जिलों में से 28 बाढ़ के खतरे वाले माने जाते हैं. यहां साल भर में जो कुछ होता है बाढ़ उसे तबाह कर जाती है.
आर्थिक रूप से पिछड़े रहने की एक बड़ी वजह बाढ़ को माना जाता है।

ये कुछ बिहार की प्रमुख नदियां है जो जीवन रेखा के साथ साथ तबाही की भी मुख्य कारण बनती है-

1. कोसी का कहर

कोसी नदी को बिहार का अभिशाप ऐसे ही नहीं कहा जाता, हर साल कोसी से लगते कई जिलों में भीषण बाढ़ आती है और सबकुछ बहा ले जाती है। खासकर सहरसा, सुपौल, मधेपुरा और आसपास के जिलों में तबाही हर साल की कहानी है, इस बार भी कोसी नदी पर बनाया मुख्य तटबंध सुपौल में कई जगहों से टूट चुका है।
लोगों को 2008 जैसी तबाही का खतरा सता रहा है. उस बाढ़ में 23 लाख लोग प्रभावित हुए थे। ये नदी नेपाल में हिमालय से निकलती है और बिहार में भीम नगर के रास्ते से दाखिल होती है। इसके भौगोलिक स्वरूप को देखें तो पता चलेगा कि पिछले 250 वर्षों में 120 किमी का विस्तार कर चुकी है।

2. गंडक

नेपाल से आने वाली नदियों में गंडक और बूढ़ी गंडक प्रमुख नदियां हैं। इनके पानी में उफान से बिहार के 6 जिलों में बाढ़ जैसे हालात हैं, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, वैशाली एवं सारण जिलों के कई इलाके बाढ़ की चपेट में हैं।

3. बागमती

नेपाल से ही निकलने वाली बागमती नदी उत्तर बिहार के कई जिलों में कहर बरपा रही है, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी जिलों के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात हैं। बिहार में इस नदी की कुल लम्बाई 394 किलोमीटर है, इसकी सहायक नदियां हैं- विष्णुमति, लखनदेई, लाल बकेया, चकनाहा, जमुने, सिपरीधार, छोटी बागमती और कोला नदी।

4. गंगा

उत्तर भारत की जीवनरेखा कही जाने वाली गंगा नदी का पानी अभी तो स्थिर है लेकिन कई जगह बढ़ता जलस्तर चिंता बढ़ा रहा है। गंगा भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी है।
यह भारत और बांग्लादेश में कुल मिलाकर 2525 किलोमीटर की दूरी तय करती है। उत्तराखंड में हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी के सुंदरवन तक विशाल भू-भाग को सींचती है। गंगा का जलस्तर वैसे तो अभी स्थिर है लेकिन लगातार बारिश से कभी भी इस नदी का पानी विकराल रूप ले सकता है।

2 thoughts on “बिहार की ये नदियां जो हर साल बनती है तबाही की वज़ह, अब तक करोड़ों का नुकसान

  1. अपने वैशाली जिला फिलहाल सबसे ज्यादा कहर वाया नदी का है

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