October 2, 2022

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सच का आईना

बिहार #सारण #छपरा #भिखारी #ठाकुर #पद्मश्री #रामचन्द्र_माँझी #निधन #दुःखद

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भोजपुरी का शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर के साथी या यों कहें कि उनके नाटक मण्डली के सदस्य रहे और ‘लौंडा नाच’ को जीवित रखने वाले लोक कलाकार रामचन्द्र माझी आज नहीं रहे। सम्भवतः ये भिखारी ठाकुर के मण्डली के आखिरी व्यक्ति बचे थे, जो आज IGIMS में आखिरी सांस लिए। पिछले कई दिनों से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे।

 

इन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान सिर्फ 84 वर्षीय रामचन्द्र माझी जी का ही नहीं था, बल्कि पूरे सारण (छपरा) जिला का है यों कहें कि पूरे भोजपुरिया समाज था। सबने गौरवान्वित महसूस किया था। ‘लौंडा नाच’ भोजपुरिया समाज में बहुत प्रसिद्ध रहा है। इस सम्मान को दिलाने में ‘लौंडा नाच’ पर काम करने वाले अध्येता व व्याख्याता Jainendra Dost का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने दस्तावेजीकरण के साथ सार्थक पहल किया, तब कहीं जाकर अपने बुजुर्ग अभिभावक को यह सम्मान हाँथ लग पाया।

 

सारण(छपरा) के तुझारपुर गाँव में जन्में रामचंद्र माझी ने लगभग 10 वर्ष के उम्र से ही अदाकारी शुरू कर दिया। शीघ्र ही ये प्रसिद्ध लोक कलाकार भिखारी ठाकुर के सम्पर्क में आ गए। भिखारी ठाकुर के जाने के बाद भी उनकी परम्परा को जीवित रखने का श्रेय रामचंद्र माझी जी को जाता है। 2017 में इन्हें संगीत नाट्य अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। ये उम्र के आखिरी पड़ाव पर भी ‘बिदेशिया’ और ‘बेटी-बेचवा’ के प्रसंग से दर्शकों को भावविभोर कर देते थे।

दिवंगत रामचंद्र माझी जी को विनम्र श्रद्धांजलि!💐🙏

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