November 25, 2022

Bhojpuriya Mati News

सच का आईना

नारी की स्वतंत्रता और उनसे जुड़े हमारे कर्त्तव्य।

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Woman holding an Indian flag in an oilseed rape field

नारी की स्वतंत्रता आज का एक बहुत ही अहम प्रश्न है। हमारा देश ब्रिटिश के शासन से जरूर स्वतंत्र हो गया है, पर आज भारत जो कि पितृ प्रधान देश है, जिसकी भूमि को माता मानी जाती है, स्त्रियों का सम्मान जहाँ प्रथम कर्तव्य है।

आज इस भारत भूमि में ही स्त्रियां सुरक्षित और स्वतंत्र नहीं है। आज प्रतिदिन देश में हर घन्टे बलात्कार की खबरें सुनने को मिलती हैं, आंकड़े बताते हैं कि हर दिन औसतन 92 महिलाओं का बलात्कार होता है। ऐसा नहीं है कि देश में महिलाओं की सुरक्षा हेतु नियम नहीं बनाये गये हैं, तो गये हैं पर कठोर क़दम नहीं उठाया गया है, मनचले आज भी अपनी मनमर्जी करते हैं । पुरूष प्रधान देश होने के चलते कहीं ना कहीं आज महिलायें बहुत सी क्षेत्रों में आगें तो हैं पर कहीं न कहीं उन्हें दबाया जाता है कभी उनके पहनावे को दोष दिया जाता है तो कभी परवरिश को। लड़के आज भी ग़लत काम कर सिर उठा के चलते हैं पर लड़कियां नहीं। गलती गलती होती है चाहे जो करे। हमारे समाज मे हीं ये हीन मानसिकता भरी पड़ी है की पुरूष हमेशा सही हैं। ये बलात्कार का शिलशिला आज से नहीं बल्कि 1972 से चलता आ रहा है, 1972 में हुआ मथुरा रेप केस, 1973 में अरुणा शानबाग रेप केस, 1996 में प्रियदर्शनी मट्टू रेप और हत्या केस । ये शिलशिला आज तक चलता आ रहा है, आंकड़े घटने से जगह बढ़ते जा रहे हैं। 2012 की निर्भया गैंग रेप जिसको कभी भुलाया नहीं जा सकता है।
सरकार पर जनता के दवाब के चलते निर्भया को इंसाफ मिला । तो कई ऐसे केस हैं जिसके आरोपी आज भी आजादी से घूम रहे हैं। कई केस तो ऐसे हैं यो दर्ज नहीं किये जाते और कुछ केस दर्ज होने पर व पुलिस प्रशासन के तरफ से कोई कदम नही उठाया जाता है। ऐसे बड़े नहीं बल्कि प्रतिदिन छोटे मोटे केस होते रहते हैं कुछ समाज के डर से छुपा दिये जाते हैं तो कुछ न्याय की मांग करते हैं। बालात्कार ही नहीं हत्या, तेजाब डालना, छेड़खानी करना बहोत से मामले हैं। “हमारे संविधान में मौलिक कर्तव्यों में(51-क) में कहा गया है कि हर नागरिक की यह जिम्मेदारी होगी कि वह स्त्री के गौरव को ठेस पहुंचाने वाली किसी भी हरकत का त्याग करें और भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे।” लेकिन अपने मौलिक कर्त्वय को नहीं समझते हैं । हाल की हीं सुदीक्षा भाटी का केस सामने आया जिसमें कुछ मनचले बाइक सवारों के चलते आज ये होनहार लड़की हमारे बीच नहीं रहीं बहोत मुश्किलों का सामना कर गरीब परिवार से होने के बावजूद स्कॉलरशिप पे अमेरिका के कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई कर रही थीं । सरकार के कठोर नियम भी मनचलों को नहीं सुधार पा रहे ऐसा क्यों है ये हमें सोचना चाहिये। भारत को हम भारत माँ कहते है तो यहाँ स्त्रियों के स्त्रीत्व की रक्षा का भी जिम्मा हमारा है।

इस बार हम 74वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहे हैं उम्मीद करते है हम स्त्रियों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होंगे और उनसे जुड़े मसलों पर हमारी प्राथमिकता सर्वप्रथम होगी।

स्वतत्रंता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

इस लेख को हमारे लिए लिखा है- PUJA SHARMA (SM COLLEGE) ने जो कि हिन्दी साहित्य प्रतिष्ठा की छात्रा हैं।

1 thought on “नारी की स्वतंत्रता और उनसे जुड़े हमारे कर्त्तव्य।

  1. Aazadi to sabhi ko sahi mayne me ab tak tak nhi mili.NARI ko samaj k bandhan se aazadi nhi mili aur purush ko heen soch se.Well done puja..

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